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DEEPAK PAL

23rd Aug · SEBI-Registered Analyst

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अगर आप Nifty या Bank Nifty में Options Trading करते हैं, तो आपने अक्सर सुना होगा: “PCR 1.2 है” “PCR 0.8 है” “PCR 1.5 पहुंच गया” लेकिन सवाल है: PCR आखिर होता क्या है और इसे देखकर Market की Direction कैसे समझें? @@PCR क्या है? PCR का पूरा नाम है: Put-Call Ratio यह बताता है कि Market में Put Options और Call Options की तुलना कितनी है। सबसे basic formula: PCR = Put Open Interest ÷ Call Open Interest उदाहरण: अगर: Put OI = 12 लाख Call OI = 10 लाख तो: PCR = 12 ÷ 10 = 1.20 यानी Calls की तुलना में Puts का Open Interest ज्यादा है। लेकिन जब PCR बहुत कम होता है, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि Market में short positions ज्यादा जमा हो चुकी हैं। ऐसे में अगर Price Action मजबूत होने लगे या कोई positive trigger आए, तो Short Covering की संभावना बढ़ सकती है और Market में recovery देखने को मिल सकती है। PCR जितना कम, Short Covering या Possible Recovery की संभावना उतनी अधिक हो सकती है। हालांकि, केवल कम PCR देखकर तुरंत bullish trade नहीं लेना चाहिए। इसे Price Action, Open Interest, OI Unwinding, Support Levels और Volume के साथ confirm करना जरूरी है। @@PCR ≈ 1 Puts और Calls लगभग बराबर। Neutral Zone @@High PCR हमेशा Bullish नहीं होता! मान लीजिए: PCR = 1.6 Higher PCR = अधिक सावधानी अगर PCR लगातार बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच रहा है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि: Market में bullish positions ज्यादा crowded हो गई हैं। ------->PCR को ऐसे याद रखें PCR लगातार कम हो रहा हो अब तुरंत Short करने के बजाय सावधानी बरतें — Recovery या Short Covering की संभावना बन सकती है। PCR लगातार बढ़ रहा हो इसे तुरंत Bullish Signal न मानें — अगर positioning बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो reversal या downside risk बन सकता है। PCR में तेज गिरावट Put positions के unwind होने और market recovery की संभावना का संकेत हो सकता है। ## SOME STOCKS WITH PCR EXAMPLE

APLAPOLLO
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