“क्रूड, करेंसी और डर — बाजार अब सिर्फ खबर नहीं, दिशा ढूंढ रहा है।”
वैश्विक बाजार में अभी रिस्क-ऑफ मूड हावी है, क्योंकि क्रूड प्राइस, डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड्स और भू-राजनीतिक तनाव मिलकर निवेशक भावना को कमजोर कर रहे हैं। Reuters के नवीनतम अपडेट के अनुसार, शुक्रवार को US स्टॉक्स AI-फ्यूएल्ड हाई से नीचे आए, जब तेल की कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया।
क्रूड ऑयल और बढ़ सकता है अगर मिडिल ईस्ट तनाव, सप्लाई बाधा, या शिपिंग रूट से जुड़े जोखिम, जैसे Strait of Hormuz की चिंताएँ, और मजबूत बने रहते हैं। EIA के अनुसार, तेल की कीमतों को भू-राजनीतिक रुकावटें, मौसम की घटनाएँ, रिफाइनरी आउटेज, और पाइपलाइन समस्याएँ ऊपर धकेल सकती हैं; अभी बाजार में सप्लाई का डर मांग से ज्यादा बड़ा कारण है।
गोल्ड और सिल्वर की कीमतें भी और बढ़ सकती हैं, क्योंकि महंगाई का डर, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, और सेफ-हेवन खरीदारी को समर्थन दे रहे हैं। गोल्ड को मिडिल ईस्ट तनाव, तेल-आधारित महंगाई, और सेंट्रल बैंक की मांग सपोर्ट कर रही है, जबकि सिल्वर को भी precious metal follow-through और rate-cut expectations का समर्थन मिल रहा है।
डॉलर इसलिए मजबूत हो रहा है क्योंकि निवेशक सेफ-हेवन एसेट्स की ओर जा रहे हैं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति इसका सहारा बन रही है, और ऊँची यील्ड्स डॉलर की मांग को सपोर्ट कर रही हैं। World Bank के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता, Fed से जुड़ी दरों की उम्मीदें, और flight to safety डॉलर को और मजबूत बनाते हैं।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण ऊँचा क्रूड, कमजोर रुपया, FII बिकवाली, और वैश्विक अनिश्चितता है। TOI और ET की रिपोर्ट्स के मुताबिक बाजार गिरावट के साथ निवेशक संपत्ति में भारी कमी आई, क्योंकि तेल का बिल बढ़ रहा है, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के पास है, और विदेशी निवेशक बिकवाली जारी रखे हुए हैं।
18 मई को रिजल्ट कैलेंडर के अनुसार

















