FII बिकवाली से घबराने की ज़रूरत नहीं – एक फ़ंडामेंटल इन्वेस्टर की सोच (Part 2)
FIIs के खरीदने और बेचने की वजहें हमसे पूरी तरह अलग होती हैं। एक बड़ा अंतर ये है कि वे किसी भी भारतीय स्टॉक की वैल्यू हमसे ज़्यादा डिस्काउंट रेट (Ke) पर तय करते हैं। 📌 भारतीय इन्वेस्टर्स के लिए: Ke = Risk-free rate + Beta + Market Risk Premium 📌 FIIs के लिए: Ke = Risk-free rate + Beta + Market Risk Premium + Country Risk Premium + Currency Risk मतलब अगर आपका Ke = 12% है, तो FIIs के लिए वही 15% या उससे ज़्यादा हो सकता है! और ये छोटा सा 3% अंतर भी DCF जैसी वैल्यूएशन मेथड में बहुत बड़ा असर डालता है। यही वजह है कि FIIs पिछले 4 साल से लगातार भारतीय स्टॉक्स बेच रहे हैं। तो क्या हमें FII बिकवाली को पूरी तरह इग्नोर करना चाहिए? ❌ नहीं। लेकिन बिना सोचे-समझे उन्हें फॉलो करना भी सही नहीं है। अगर आपने ATH (All-Time High) पर किसी स्टॉक के फंडामेंटल्स पर भरोसा किया था और सिर्फ़ प्राइस गिरने से डर रहे हैं, तो SIP स्टाइल में खरीदते रहें। मार्केट का रिवर्सल कब होगा, ये कोई नहीं जानता। लेकिन अच्छे स्टॉक्स को देर-सवेर उनकी सही कीमत मिलती ही है। घबराने के बजाय लॉन्ग-टर्म फ़ंडामेंटल्स पर फोकस करें। 💪🚀

















