गोयल ने खोली FTA परामर्श की राह — क्यों अब उद्योगों की सुनी जा रही है बात
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) पर अगली बातचीत से पहले उद्योगों और निर्यातकों से सीधे बातचीत कर रहे हैं। वर्षों से केवल राजनयिकों द्वारा चलाए जा रहे व्यापार समझौतों में अब पहली बार व्यवसायों से पूछा जा रहा है: “आपको केवल टिकने के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने के लिए क्या चाहिए?” 🔍 क्या नया हो रहा है: * गोयल उन क्षेत्रों की राय ले रहे हैं जो पहले के FTA (आसियान, जापान, कोरिया) से प्रभावित हुए * फोकस अब ऐसे देशों पर है जिनकी अर्थव्यवस्थाएं भारत के लिए पूरक हैं — न कि सस्ते आयात से बाजार भरने वाले * स्टील, फार्मा, वस्त्र, आईटी, ईवी कंपोनेंट्स, और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को टैरिफ लाभ और सुरक्षा देने के लिए चिह्नित किया जा रहा है 🧠 क्यों है यह अहम: यह केवल नीतिगत बदलाव नहीं, संरचनात्मक बदलाव है — भारत अब केवल “वैश्विक दिखावे” के लिए समझौते नहीं कर रहा। अब हर डील का मकसद है: घरेलू उद्योग को ठोस लाभ देना। अब से व्यापार समझौतों से कुल निर्यात मात्रा नहीं, बल्कि नेट एक्सपोर्ट प्रभाव बढ़ाने पर जोर रहेगा।

















