जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तब ONGC क्या फायदा उठाता है?
एक नजर पुराने डेटा पर 👀 जब भी दुनिया में कोई बड़ा संकट आता है और कच्चे तेल की कीमतें चढ़ती हैं, तो ONGC पर सबकी नजर जाती है। लेकिन असली सवाल ये है — क्या इसे सच में फायदा होता है? और कितना टिकता है? चलिए, दो बड़े मामलों को देखते हैं: 🔍 📈 केस 1: रूस-यूक्रेन जंग (फरवरी 2022 – मिड 2023) क्रूड ऑयल ~$90 से बढ़कर $130 हो गया ONGC का शेयर Feb–May 2022 के बीच ~30% ऊपर गया लोग उम्मीद कर रहे थे कि कंपनी को अपने तेल पर ज्यादा दाम मिलेंगे लेकिन... ❌ सरकार ने विंडफॉल टैक्स लगा दिया ❌ सब्सिडी का प्रेशर भी आया ➡️ नतीजा: शेयर की तेजी ज़्यादा दिन नहीं टिक पाई 📈 केस 2: मिडल ईस्ट में तनाव और COVID के बाद की रिकवरी (2020 – शुरू 2021) क्रूड की कीमतें धीरे-धीरे ऊपर आने लगीं ONGC ₹65 (मार्च 2020) से ₹120+ तक पहुंचा ग्लोबल क्रूड की तेजी से मुनाफा बढ़ा फिर वही बात — ❌ सरकारी दखल आया ➡️ शेयर की रफ्तार थम गई 👉 सीधी बात: ✔️ जब भी तेल की कीमतें बढ़ती हैं, ONGC का शेयर शुरुआत में बढ़ता है ❌ लेकिन सरकार के टैक्स और सब्सिडी जैसे फैसले फायदे को काट देते हैं 🔁 मतलब ये शेयर ज्यादा माहौल पर चलता है, कंपनी की खुद की परफॉर्मेंस पर कम ⚠️ ध्यान रहे: ONGC पहली लहर में चल सकता है (जब तेल चढ़ता है), लेकिन दूसरी लहर में (जैसे टैक्स, कंट्रोल) फु्स्स भी हो सकता है

















